Operation Kayakalp


‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के अन्तर्गत परिषदीय विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के सुधार एवं संतृप्तीकरण हेतु निर्देश दिये गये हैं |

‘ऑपरेशन कायाकल्प ‘ के अन्तर्गत चिन्हित किये जाने वाले निर्मितियों / आधारभूत संरचनाओं में प्राथमिक विद्यालयों एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को सर्वाधिक प्राथमिकता दी जाये | यधपि ग्राम पंचायत में स्थिति अन्य सार्वजनिक भवन, जैसे- पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केन्द्र, विद्यालय निःसंदेह सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि इन्हीं निर्मितियों मे भविष्य के भारत की नींव रची जाती है | परन्तु अधिकांश आंगनवाड़ी केन्द्र प्राथमिक विद्यालयों में ही अवस्थित होते हैं  इसलिए भी परिषदीय विद्यालयों को अवस्थापना सुविधाओं  का विकास सर्वाधिक युक्तियुक्त होगा | विविध स्तर के निर्वाचनों में भी इन्ही संरचनाओं का सर्वाधिक उपयोग होता है | इसलिये ऑपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालयों एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को संतृप्त किया जाना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है |
 एतद क्रम में कार्यों के वरीयता क्रम का निर्धारण निम्नवत किया जाता है –
1- ब्लैक-बोर्ड |
2- छात्र-छात्राओं के लिये उनकी संख्या के अनुरूप अलग-अलग शौचालय एवं मूत्रालय की व्यवस्था |
3- स्वच्छ पेयजल एवं मल्टीपल हैंडवॉशिंग सिस्टम की सुविधा एवं जल निकासी का कार्य |
4- विद्यालय की दीवारों, छत तथा दरवाजे / खिड़की फ़र्श की वृहद मरम्मत का कार्य तथा यथासंम्भव फ़र्श में टाइल्स लगाया जाना |
5- विधुतीकरण |
6- किचन शेड का जीर्णोद्धार एवं सुसज्जीकरण |
7- फर्नीचर |
8- चहारदीवारी एवं गेट का निर्माण कार्य |
9- इण्टरलॉकिंग, टाइल्स – विद्यालय प्रांगण में |
10-अतिरिक्त कक्षा -कक्ष का निर्माण |
11-अन्य कार्य -स्थानीय आवश्यकतानुसार |

उपर्युक्त कार्यों के संतृप्तीकरण के सन्दर्भ में शौचालय एवं पेयजल की व्यवस्था बाल -मैत्रिक संरचना के अनुरूप निर्मित किये जाने चाहिए | शौचालय  मूत्रालय एवं पेयजल व्यवस्था हेतु संरचनात्मक कार्य के समय दिव्यांग छात्र-छात्राओं की सुविधाओ का भी ध्यान रखा जाना चाहिए | इसी क्रम में विद्यालय का जीर्णोद्धार भी इस प्रकार किया जाना चाहिए कि सभी प्रकार की टूट-फूट एवं वृहद मरम्मत एक मुश्त रूप में हो सके |

उपरोक्त में प्रथम तीनों उप बिंदुओं पर उल्लिखित कार्यों की कार्ययोजना प्रथम चरण में बनायी जाय तथा इसके बाद शेष कार्यों हेतु उपर्युक्त वरीयता क्रम में कार्ययोजना बननी चाहिए | यदि पर्याप्त धनराशि उपलब्ध हो तो एक ही बार में उक्त समस्त कार्य कराये जा सकते हैं |

इसी क्रम में यह भी अपेछित है कि यदि विद्यालय प्रांगण में कोई अत्यंत पुराना / जर्जर / निष्प्रयोज्य संरचना / खंडहर पड़ा हुआ हो तथा जीर्णोद्धार संम्भव न हो और उसके बने रहने से विद्यालय के बच्चों के लिये असुरक्षा की आशंका बनी हो तो ऐसे जर्जर भवन किसी भी विभाग के हो तो सर्वप्रथम बेसिक शिक्षा अनुभाग-5  के शासनादेश संख्या-128 /68-5-2011 दिनांक – 28.06.2019 के अनुरूप ऐसे अवशेष को पूरी तरह से बेसिक शिक्षा विभाग के पूर्व प्रेषित नियमो / निर्देशों  के अनुसार ध्वस्त कर मलबे को युक्तियुक्त रूप से हटाया जाना अनिवार्य होगा |  इसके साथ यदि कहीं नये भवन की आवश्यकता हो तो, इसका प्रस्ताव बेसिक शिक्षा विभाग उ0प्र0 शासन को प्रेषित किया जाये |